रविवार, 28 जून 2009

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इटावा के एक कसबे पोलिस वालो ने एक लड़की जो की वर्ष की थी उसेबहुत बेरहमी से पीटा जहां तक की वह नाबालिक थी उसे पर चोरी काआरोपे लगाया था की उसने एक दुकानदार की दुकान से २५० रुपये चोरीकरलिया यह आरोपे लगाया था उसे लड़की पर उसे दुकानदार ने उसलड़की को पोलिस ठाणे लेगये और उन कानुन के रख वालो को शॉपदिया फिर उन्होंने उस लकड़ी को बहुत बेरहमी से पीटा उसके बलों कोखीचा उन को यह नही मालूम था कि यह लड़की नाबालिक हैं तब एकपत्रकार ने आकर उस पूरे सीन को आपने कैमरे मैं कैद किया
और उस २५० रुपये को उस आदमी को दिए जिसकी दुकान थी जिसनेचोरी का आरोपे लगाया था उस माडिया कर्मी ने उस लड़की को बचाया और उस पूरी घटना को अपने कैमरे मैं कैदकर समाचार और टीबी पर दिखाया तब उन पोलिस वालो को निलंबित कर दिया इस घटना से यह पता चलता हैंकि मानव अधिकार का उलंघन करना तथा उनको नियम के अनुकूल रखना यही होता है हमारे देश मैं इस तरह केकानुन से तो देश समाज को नही बचाया जा सकता जो कानुन हमारी सुरक्षा करें के लिए हैं वही कानुन सेअपरचित हो तो इस देश का क्या होगा और समाज का ऐसे कैसे देश मैं प्रतिदिन होते तो हैं पर कैमरे मैं कैद नही होपते इसलिए उनको कोई समझ नही पता और देश मैं उनकी पहचान नही हो पाती और बाल शोषण अधिकार केलिए इस तरह कि घटना एक अनोखी चाहिए जिससे उन सभी समाज के लोगों को पाटा चल सके और उन कानुननियमोइमो का पालन किया जा सके देश व् राज्य कि सरकार पोलिस मैं उन लोगो को भरती कर लेती हैं जोअशिचित हैं जिन्हें मानव अधिकार तो कानुन का तक नही पता उन लोगो को देश कि रक्षा के लिए नही रखनाचाहिए शिचित वियक्ति को ही नियोक्त करे जिससे समाज को बचने से रोक सके

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